UPTET/CTET हिंदी भाषा प्रैक्टिस सेट 38 : परीक्षा में जानें से पहले विगत वर्षों के इन 30 महत्वपूर्ण प्रश्नों का करें अध्ययन

CTET/UPTET Hindi Language Practice Set 38 : CTET की परीक्षा प्रारंभ हो चुकी है जोकि 13 जनवरी तक चलने वाली है, इस परीक्षा की तैयारी अभ्यर्थी कई महीनों से कर रहें है ताकि परीक्षा में बेहतर अंक प्राप्त कर सकें। CTET की परीक्षा ऑनलाईन माध्यम द्वारा कराई जा रही है। UPTET परीक्षा तिथि की घोषणा हो चुकी है, जो कि 23 जनवरी 2022 को आयोजित कराई जाएगी।

ऐसे में इस लेख के माध्यम से हम आपको UPTET/CTET के परीक्षा में पूछे गए विगत वर्षों के हिंदी भाषा के 30 महत्वपूर्ण प्रश्नों से अवगत कराएंगे, जिसका अध्ययन कर के आप अपनी तैयारी को और भी मजबूत बना सकतें हैं।

CTET/UPTET Hindi Language Practice Set 38
CTET/UPTET Hindi Language Practice Set 38

CTET/UPTET Hindi Language Practice Set 38

प्रश्न : बच्चों की भाषा क्षमता का आकलन करने की दृष्टि से निम्नलिखित में से कौन-सा प्रश्न सर्वाधिक उपयोगी एवं सार्थक है?

  • लिखे शब्दों को पढ़कर सुनाइए – ”जंगल धरती”
  • लिखे वाक्य को पढ़कर सुनाइए “मुझे कहानी सुनना अच्छा लगता है।”
  • दिए गए शब्दों के वचन बदलिए – “तितली चूहा”
  • फेरीवालों की आवाजें सुनिए और किसी एक का कक्षा में अभिनय करके दिखाइए

उत्तर : 4

प्रश्न : सभी भाषाई कुशलताएँ

  • एक-दूसरे से संबद्ध हैं
  • एक-दूसरे से बढ़कर हैं
  • एक-दूसरे से अलग हैं
  • एक-दूसरे को प्रभावित नहीं करती

उत्तर : 1

प्रश्न : भाषा का प्रमुख प्रकार्य है

  • लेखन दक्षता
  • भाषण देना
  • प्रतिवेदन लेखन
  • संप्रेषण करना

उत्तर : 4

प्रश्न : संदर्भ के अनुसार शब्दों के उपयुक्त चयन संबंधी त्रुटियों को दूर करने के लिए सर्वाधिक कारगर तरीका क्या है?

  • विविध भाषा प्रयोग से परिचित कराना
  • विविध शब्दों का वाक्य-प्रयोग करवाना
  • व्याकरण की विविध पुस्तकें पढ़ाना
  • विविध शब्दों की सूची याद करवाना

उत्तर : 2

प्रश्न : श्यामला केवल उन्हीं प्रश्नों के उत्तर लिखती है जो उसने याद किए होते हैं। इसका कारण हो सकता है

  • उसकी कक्षा में सब ऐसा ही करते हैं
  • उसकी विचार प्रक्रिया अव्यवस्थित है
  • उसकी स्मरण शक्ति बहुत तेज है
  • उसमें कल्पनाशीलता जैसे गुण का अभाव है

उत्तर : 4

प्रश्न : किस तरह के बच्चों को हिन्दी भाषा सीखने में अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ेगा?

  • जिनकी मातृभाषा मानक हिन्दी नहीं है
  • जिनकी मातृभाषा सरल है।
  • जिनकी मातृभाषा हिन्दी से भिन्न है
  • जिनकी मातृभाषा हिन्दी के समान है।

उत्तर : 3

प्रश्न : पाठ्य पुस्तक का नया पाठ आरम्भ करने से पहले अध्यापक के लिए आवश्यक है कि वह

  • पाठ से मिलने वाली सीख के बारे में बताए
  • पाठ के मूल भाव पर बातचीत करें
  • पाठ के कठिन शब्द को श्यामपट्ट पर लिखकर उनका अर्थ बताए परिचय लिखवाए
  • पाठ के रचनाकार

उत्तर : 2

निर्देश : नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए निम्नलिखित आठ प्रश्नों के सही/सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प को चुनिए।

    मेरे मकान के आगे चौराहे पर ढाबे के आगे फुटपाथ पर खाना खाने वाले लोग बैठते हैं- रिक्शेवाले, मजदूर, फेरीवाले, कबाड़ी वाले ....  । आना-जाना लगा ही रहता है। लोग कहते हैं- "आपको बुरा नहीं लगता? लोग सड़क पर गंदा फैला रहे हैं और आप इन्हें बरदाश्त कर रहे हैं? इनके कारण पूरे मोहल्ले की आबोहवा खराब हो रही हैं।"
   मैं उनकी बातों को हलके में ही लेता हूँ। मुझे पता है कि यहाँ जो लोग जुटते हैं वे गरीब लोग होते हैं। अपने काम-धाम के बीच रोटी खाने चले आते हैं और खाकर चले जाते हैं। ये आमतौर पर बिहार से आए गरीब ईमानदार लोग हैं जो हमारे इस परिसर के स्थायी सदस्य हो गए हैं। ये उन अशिष्ट अमीरों से भिन्न हैं जो साधारण-सी बात पर भी हंगामा खड़ा कर देते हैं। लोगों के पास पैसा तो आ गया पर धनी होने का शऊर नहीं आया। अधजल गगरी छलकत जाए की तर्ज पर इनमें दिखावे की भावना उबाल खाती है।
    असल में यह ढाबा हमें भी अपने माहौल से जोड़ता है। मैं लेखक हूँ तो क्या हुआ? गाँव के एक सामान्य घर से आया हुआ व्यक्ति हूँ। बचपन में गाँव-घरों की गरीबी देखी है और भोगी भी है। खेतों की मिट्टी में रमा हूँ, वह मुझमें रमी है। आज भी उस मिट्टी को झाडझूड़ कर भले ही शहरी बनने की कोशिश करता हूँ, बन नहीं पाता। वह मिट्टी बाहर से चाहे न दिखाई दे, अपनी महक और रसमयता से वह मेरे भीतर बसी हुई है। इसीलिए मुझे मिट्टी से जुड़े ये तमाम लोग भाते हैं। इस दुनिया में कहा-सुनी होती है, हाथापाई भी हो जाती है लेकिन कोई किसी के प्रति गाँठ नहीं बाँधता। दूसरे-तीसरे ही दिन परस्पर हँसते-बतियाते और एक दूसरे के दुख-दर्द में शामिल होते दिखाई पड़ते हैं। ये सभी कभी-न-कभी एक दूसरे से लड़ चुके हैं लेकिन कभी इसकी प्रतीति नहीं होती कि ये लड़ चुके हैं। कल के गुस्से को अगले दिन धूल की तरह झाड़कर फेंक देते हैं। 

प्रश्न : प्रस्तुत गद्यांश साहित्य की किस विधा के अंतर्गत आएगा?

  • रेखाचित्र
  • जीवनी
  • कहानी
  • संस्मरण

उत्तर : 1

प्रश्न : ‘गाँठ बाँधना’ का अर्थ है

  • क्रोध करना
  • सँभालकर रखना
  • गाँठ लगाना
  • मन में रखना

उत्तर : 4

प्रश्न : लोग लेखक से क्यों पूछते हैं कि क्या आपको बुरा नहीं लगता?

  • वे गंदे लोग हैं।
  • वे लोग आसपास गंदगी बिखेर देते हैं।
  • वे लेखक से रुष्ट रहते हैं।
  • उन्हें गरीबों से मेल-जोल पंसद नहीं।

उत्तर : 4

प्रश्न : लेखक लोगों की शिकायतों को हलके में लेता है, क्योंकि

  • जुटने वाले लोग गरीब और ईमानदार हैं।
  • शिकायत करना लोगों की आदत होती है
  • यह किसी बात को गंभीरता से नहीं लेता
  • लेखक उन्हें जानता-पहचानता हैं

उत्तर : 1

प्रश्न : साधारण बात पर भी हंगामा कौन खड़ा कर देते हैं?

  • अमीर किन्तु असभ्य लोग
  • लेखक के परिचित लोग
  • अशिष्ट रेहड़ी-पटरी वाले
  • गाँव से आए गरीब मजदूर

उत्तर : 1

प्रश्न : “इस दुनिया में कहा-सुनी होती है”…. ‘इस दुनिया’ का संकेत हैं

  • अमीर किन्तु अशिष्ट लोग
  • गाँव से शहर आ बसे गरीब
  • शहर से गाँव आ बसे मजदूरों की दुनिया
  • लेखक को उकसाने वाला पड़ोस

उत्तर : 2

प्रश्न : ‘अधजल गगरी छलकत जाए’ किसके संदर्भ में कहा गया है?

  • अमीर बन गए असभ्य लोगों के लिए
  • गाँव से शहर आकर कमाई करने वालों के लिए
  • लेखक जैसे प्रबुद्धों के लिए
  • अनपढ़ ग्रामीणों के लिए

उत्तर : 1

प्रश्न : ‘धूल की तरह झाड़कर फेंक देना’ का आशय है

  • सफाई से रहना
  • छोटों की उपेक्षा करना
  • दूसरे को दे देना
  • पूरी तरह भुला देना

उत्तर : 4

निर्देश : नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए निम्नलिखित आठ प्रश्नों के सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।

   “भारत 15 अगस्त, 1947 को आजाद हुआ। इस आजादी के लिए पूरे देश की जनता ने एक लंबा और मुश्किल संघर्ष चलाया था। इस संघर्ष में समाज के बहुत सारे तबकों की हिस्सेदारी थी। तरह-तरह की पृष्ठभूमि लोगों ने इसमें भाग लिया। वे स्वतंत्रता समानता तथा निर्णय प्रक्रिया में हिस्सेदारी के विचारों से प्रेरित थे। औपनिवेशिक शासन के तहत लोग ब्रिटिश सरकार से भयभीत रहते थे। वे सरकार के बहुत सारे फैसलों से असहमत थे। लेकिन अगर वे इन फैसलों की आलोचना करते तो उन्हें भारी खतरों का सामना करना पड़ता था। स्वतंत्रता आंदोलन ने यह स्थिति बदल डाली। राष्ट्रवादी खुलेआम ब्रिटिश सरकार की आलोचना करने लगे और अपनी माँगें पेश करने लगे। 1885 में ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने माँग की कि विधायिका में निर्वाचित सदस्य होने चाहिए और उन्हें बजट पर चर्चा करने एवं प्रश्न पूछने का अधिकार मिलना चाहिए। 1909 में बने गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ऐक्ट ने कुछ हद तक निर्वाचित प्रतिनिधित्व की व्यवस्था को मंजूरी दे दी। हालाँकि ब्रिटिश सरकार के अंतर्गत बनाई गई ये शुरुआती विधायिकाएँ राष्ट्रवादियों के बढ़ते जा रहे दबाव के कारण ही बनी थीं, लेकिन इनमें भी सभी वयस्कों को न तो वोट डालने का अधिकार दिया गया था और न ही आम लोग निर्णय प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते थे।"

प्रश्न : निम्नलिखित में से लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल्य
कौन -सा है?

  • समानता
  • विचारों की अभिव्यक्ति
  • स्वतंत्रता
  • उपर्युक्त सभी

उत्तर : 4

प्रश्न : आंदोलन का क्या असर पड़ा?

  • ब्रिटिश शासक चले गए
  • सरकार की खुलकर आलोचना होने लगी
  • लोगों को हिस्सेदारी मिल गई
  • लोकतंत्र स्थापित हो गया

उत्तर : 2

प्रश्न : लोग किन विचारों से प्रेरित होकर आजादी के संघर्ष में शामिल हुए?

  • स्वतंत्रता
  • समानता
  • निर्णय प्रक्रिया में हिस्सेदारी
  • उपर्युक्त सभी

उत्तर : 4

प्रश्न : आजादी के लिए संघर्ष किसने चलाया?

  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने
  • देश की जनता ने
  • ब्रिटिश सरकार ने
  • सदस्यों ने

उत्तर : 2

प्रश्न : कांग्रेस की क्या माँग थी ?

  • भारतीय पुरजोर विरोध करें
  • विधायिका में चुने हुए सदस्य
  • अंग्रेजों भारत छोड़ो
  • आजादी दो

उत्तर : 2

प्रश्न : सबसे सटीक/सार्थक वाक्य चुनिए।

  • संघर्ष मनुष्य को सफलता दिलाता है।
  • संघर्ष मनुष्य को उजाड़ता है।
  • संघर्ष मनुष्य को भटकाता है।
  • संघर्ष मनुष्य को निखारता है।

उत्तर : 1

प्रश्न : ‘दबाव’ शब्द का प्रयोग कहाँ पर होगा?

  • चढ़ता …….. गिरता गया
  • हवा का …….. कम हो गया।
  • भीड़भाड़………..से था।
  • सभी चुपचाप………से थे।

उत्तर : 2

प्रश्न : ‘खुलेआम’ शब्द का सबसे सार्थक प्रयोग है

  • खुलेआम नगाड़े बज रहे थे।
  • खुलेआम बरसात हो रही थी।
  • खुले आम बुराइयाँ हो रही थीं।
  • खुलेआम नाक बन रही थी ।

उत्तर : 3

निर्देश : नीचे दी गई कविता को पढ़कर पूछे गए निम्नलिखित सात प्रश्नों के सही / सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए।

  मुख्य गायक के चट्टान जैसे भारी स्वर का साथ देती थी
  वह आवाज सुंदर कमजोर काँपती हुई थी
  वह मुख्य गायक का छोटा भाई है। 
  या उसका शिष्य
  या पैदल
  मुख्य गायक की गरज में
  वह अपनी गूँज मिलाता आया है प्राचीन काल से
  गायक अब अंतरे की जटिल तानों के जंगल में
  खो चुका होता है
  या अपने ही सरगम को लाँघकर
  चला जाता है भटकता हुआ एक अनहद में 
  तब संगतकार ही स्थायी को सँभाले रहता है
  जैसे समेटता हो मुख्य गायक का पीछे छूटा हुआ सामान
  जैसे उसे याद दिलाता हो उसका बचपन
  जब वह नौसिखिया था
  तारसप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला
  प्रेरणा साथ छोड़ती हुई उत्साह अस्त होता हुआ
  आवाज से रास जैसा कुछ गिरता हुआ
  तभी मुख्य गायक को ढांढस बंधाता
  कहीं से चला आता है संगतकार का स्वर
  कभी-कभी वह यों ही दे देता है उसका साथ
  यह बताने के लिए कि वह अकेला नहीं है 
  और यह कि फिर से गाया जा सकता है
  गाया जा चुका राग
  और उसकी आवाज में जो एक हिचक साफ सुनाई देती है 
   या अपने स्वर को ऊंचा न उठाने की जो कोशिश है
   उसे विफलता नहीं
   उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए।

प्रश्न : “गायक जब अंतरे की जटिल तानों के जंगल में खो चुका होता है” के मायने हैं-अंतरे को गाते हुए वह –

  • भटक जाता है
  • लीन हो जाता है
  • बेसुरा हो जाता है
  • बेलगाम हो जाता है

उत्तर : 2

प्रश्न : ‘अनहद’ शब्द में

  • ‘द’ प्रत्यय है
  • ‘हद’ प्रत्यय है
  • ‘अ’ उपसर्ग है
  • ‘अन’ उपसर्ग है

उत्तर : 4

प्रश्न : ‘राख जैसा कुछ गिरता हुआ’ का अर्थ है

  • बुझता हुआ स्वर
  • उदास स्वर
  • ऊँचा स्वर
  • भयभीत स्वर

उत्तर : 1

प्रश्न : संगतकार के माध्यम से कवि किस प्रकार के व्यक्तियों की ओर संकेत करना चाह रहा है?

  • सहयोगी
  • सहृदय
  • समरस
  • संगदिल

उत्तर : 1

प्रश्न : ‘चट्टान’ जैसे भारी स्वर से आशय है

  • मोटी आवाज
  • पुरुष की आवाज
  • गंभीर आवाज
  • पत्थर की आवाज

उत्तर : 3

प्रश्न : ‘संगतकार’ का अर्थ है

  • गायक का साज उठाने वाला
  • गायक के साथ रहने वाला
  • गायक के साथ गाने वाला
  • गायक को बिखरने से बचाने वाला

उत्तर : 3

प्रश्न : ‘ढाँढस बँधाना’ का अर्थ है

  • तसल्ली देना
  • आशीर्वाद देना
  • आज्ञा देना
  • रक्षासूत्र बाँधना

उत्तर : ?

इस प्रश्न का सही उत्तर क्या होगा? हमें अपना जवाब कमेंट सेक्शन में जरूर दें।

आशा है आपको यह प्रैक्टिस सेट पसंद आया होगा, सरकारी परीक्षाओं से जुड़ी हर जानकरियों हेतु सरकारी अलर्ट को बुकमार्क जरूर करें।

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