CTET/UPTET बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र प्रैक्टिस सेट 42 : परीक्षा में बैठने से पहले इन 30 प्रश्नों का करें अध्ययन

CTET Child Development And Pedagogy Practice Set 42 : उत्तर प्रदेश में CTET की परीक्षा 16 दिसंबर, 2021 से शुरू हो चुकी है जो कि 13 जनवरी 2022 तक आयोजित कराई जाएगी। UPTET की परीक्षा कैंसिल होने के बाद बोर्ड की तरफ से नई परीक्षा तिथि की घोषणा की जा चुकी है। UPTET की नई परीक्षा तिथि 23 जनवरी 2022 को निर्धारित की गई है। इसलिए शिक्षक बनने की चाह रखने वाले लाखों अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल हो रहे हैं और परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।

ऐसे में इस लेख के जरिए बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र के विगत वर्षों में कराए गए परीक्षाओं में से 30 बेहद महत्वपूर्ण प्रश्नों के संग्रह को लेकर आए है। इसलिए आप इन प्रश्नों का अभ्यास अच्छी तरह से कर लें और अपनी तैयारी को और भी मजबूती प्रदान करें।

CTET Child Development And Pedagogy Practice Set 42
CTET Child Development And Pedagogy Practice Set 42

CTET Child Development And Pedagogy Practice Set 42

प्रश्न : कक्षा में प्रभावशाली अधिगम के लिए …………. वातावरण की रचना करनी चाहिए बजाए ……….. वातावरण के।

  • भयावह, सुसाध्यक
  • प्रतिस्पर्द्धिक, सुसाध्यक
  • सहयोगिक, प्रतिस्पर्द्धिक
  • प्रतिस्पर्द्धिक, सहयोगिक

उत्तर : 3

प्रश्न : निम्नलिखित में से कौन सा उदाहरण विद्यार्थियों को अधिगम के लिए अभिप्रेरित करने के लिए प्रभावशाली पद्धति है?

  • वे कार्य देना जो कि बहुत सरल हों।
  • प्रतियोगिताओं के लिए बहुत से अवसर उत्पन्न कराना।
  • पाड़ उपलब्ध कराना विशेषकर जब विद्यार्थी कोई नया कौशल सीख रहे हों।
  • सीखने से ज्यादा कार्य पूर्ण करने पर बल देना।

उत्तर : 3

प्रश्न : बच्चों के चिंतन के विषय में निम्नलिखित में कौन सा कथन सही नहीं है?

  • बच्चे अपने आस-पास की विविध घटनाओं के बारे में सक्रियतापूर्वक सोचते हैं और उनमें अन्वेषण (छान-बीन) की लालसा होती है।
  • बच्चे अपने आस पास की वस्तुओं को जानने के लिए जन्मजात जिज्ञासु होते हैं।
  • बच्चे अपने आस-पास की विविध घटनाओं के बारे में स्वयं अपने सिद्धांतों की रचना करते हैं।
  • बच्चे प्रत्ययों को स्वयं नहीं सोच सकते और अध्यापक की मूल भूमिका उन्हें जानकारी उपलब्ध कराना है।

उत्तर : 4

प्रश्न : आपकी कक्षा के एक विद्यार्थी को विभिन्न स्रोतों से बार-बार यह बताया गया है कि उसके सामाजिक वर्ग के लोग शैक्षिक क्षेत्र में निम्न स्तरीय प्रदर्शन करते हैं। इस रूढ़िवादिता एवं परिणामिक रूढ़िवादी आशंका के प्रभाव को कम करने के लिए एक शिक्षक को क्या पहल करना चाहिए?

  • वर्गों के विद्यार्थियों के बीच प्रतियोगिता आयोजित करनी चाहिए।
  • विद्यार्थी से पढ़ाई छोड़ कर किसी अन्य क्षेत्र में शामिल होने के लिए सलाह देनी चाहिए।
  • विभिन्न सामाजिक वर्गों के रोल मॉडल से संबंधित कहानियों एवं उदाहरणों को प्रस्तुत करना चाहिए।
  • इस प्रकार के सरोकारों को अनदेखा करना चाहिए।

उत्तर : 3

प्रश्न : एक शिक्षिका अपनी कक्षा में सृजनात्मक विद्यार्थियों को किस प्रकार से प्रोत्साहित कर सकती है?

  • अभिसारी चिंतन को हतोत्साहित करके
  • अनेक परिप्रेक्ष्यों को प्रोत्साहित करके तथा मूल विचारों को महत्त्व देकर
  • विद्यार्थियों को जोखिम लेने एवं चुनौतियों का सामना करने से हतोत्साहित करके।
  • अपसारी चिंतन पर बल देकर

उत्तर : 2

प्रश्न : निम्नलिखित में से कौन सा कारक कक्षा में सार्थक अधिगम का पक्ष लेता है।

  • बच्चों को पढ़ने के लिए अभिप्रेरित करने हेतु पुरस्कारों को बढ़ावा देना।
  • निर्देश के लिए केवल व्याख्यान विधि को अपनाना।
  • विषय वस्तु तथा बच्चों के संपूर्ण कुशलक्षेम एवं अधिगम के प्रति सच्चा सरोकार रखना।
  • बच्चों को पढ़ने/सीखने के लिए अभिप्रेरित करने हेतु परीक्षणों की संख्या को बढ़ाना।

उत्तर : 3

प्रश्न : जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, परिकल्पित निगमनात्मक तर्क किस अवधि में विकसित होता है?

  • पूर्व संक्रियात्मक अवस्था
  • मूर्त सक्रियात्मक अवस्था
  • अमूर्त सक्रियात्मक अवस्था
  • संवेदी- चालक अवस्था

उत्तर : 3

प्रश्न : कक्षा में अर्थपूर्ण अधिगम को प्रोत्साहित करने के लिए, अध्यापिका को

(i) विद्यार्थियों की सहायता करनी चाहिए कि वे अपने मनोभावों और अभिप्रेरणों को सुव्यवस्थित कर पायें।
(ii) विद्यार्थियों को उनके प्रदर्शन आधार पर वर्गीकृत और नामांकित करके उनके योग्यता आधारित समूह बनाने चाहिए।
(iii) विद्यार्थियों में संवाद और परिचर्चा को प्रोत्साहित करना चाहिए, जिससे वे बहुपरिप्रेक्ष्य करने में सशक्त हों।
(iv) कक्षा में विविधता की उपेक्षा करके शिक्षण की मानक विधि को अपनाना चाहिए।

  • (i), (iii), (iv)
  • (i), (ii), (iii), (iv)
  • (ii), (iii)
  • (i), (iii)

उत्तर : 4

प्रश्न : प्रतिकूल परिस्थितियों और वंचित पृष्ठभूमि वाले अधिगमकर्ताओं को संबोधित करने के लिए निम्नलिखित में से कौन सी पद्धति प्रभावशाली नहीं है?

  • विद्यार्थियों को संतुलित चुनौतीपूर्ण लक्ष्यों के लिए अभिप्रेरित करना और उपयुक्त शिक्षण सहायता उपलब्ध कराना।
  • कार्यकलापों के लिए सहयोगी समूह बनाना और विद्यार्थियों को एक दूसरे का समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • अधिगमकर्ताओं से बातचीत करके उनकी आवश्यकताओं और उनके सम्मुख आई चुनौतियों को समझना।
  • अधिगमकर्ताओं को विद्यालय के बाहर ट्यूशन पढ़ने के लिए कहना, जिससे कि अध्यापक को उन पर अधिक ध्यान न देना पड़े।

उत्तर : 4

प्रश्न : बच्चों के अधिगम में शारीरिक स्वास्थ्य और सर्विगिक अवस्था ……।

  • का कोई आपसी संबंध नहीं है।
  • की भूमिका नगण्य है।
  • का कोई प्रभाव नहीं होता है।
  • की एक महत्त्वपूर्ण भूमिका है।

उत्तर : 4

प्रश्न : निम्नलिखित में से कौन सा प्रभावशाली समस्या समाधान रणनीति का एक उदाहरण है?

  • क्रियात्मक अनम्यता- एक वस्तु के केवल परंपरागत कार्य पर ध्यान देना।
  • प्रतिक्रिया निर्धारण-समस्या प्रस्तुतीकरण के एक ही आयाम में सीमित रहना।
  • साधन-साध्य विश्लेषण- समस्या को अनेक उपलक्ष्यों में विभाजित करना ।
  • समाधान के मूल्यांकन पर बिल्कुल ध्यान नहीं देना।.

उत्तर : 3

प्रश्न : एक शिक्षक एक समावेशी कक्षा में विशेष योग्यता वर्ग वाले अधिगमकर्त्ताओं की आवश्यकताओं को किस प्रकार से बता सकता है/ संबोधित कर सकता है?

  • विद्यार्थियों को निर्देश देने के लिए एक रूप तरीकों का प्रयोग करना
  • अत्यधिक लिखित गृहकार्य देना तथा उत्तरों को अन्य प्रतिभाशाली विद्यार्थियों से नकल करने पर दबाव डालना।
  • प्रत्येक विद्यार्थी के अधिगम के सशक्त पक्षों एवं कमजोरियों के विश्लेषण के आधार पर विशिष्ट अधिगम उद्देश्यों को विकसित करना।
  • आकलन के लिए पेपर पेंसिल टेस्ट का प्रयोग करना तथा अभ्यास एवं रटने पर बल देना।

उत्तर : 3

प्रश्न : शिक्षक कक्षा में पढ़ने में ध्यान न देने वाले बच्चों से किस प्रकार का बर्ताव कर सकते हैं?

  • पूरी कक्षा के सामने उन्हें बार-बार डांटकर।
  • उनसे बात करके तथा उनकी अरुचि का कारण जानने की कोशिश करके।
  • उन्हें गृहकार्य के रूप में अत्यधिक वर्कशीट देकर।
  • बच्चों को कक्षा से बाहर जाने के लिए कहकर

उत्तर : 2

प्रश्न : …….. के अनुसार, बच्चों के चिंतन के बारे सामाजिक प्रक्रियाओं तथा सांस्कृतिक संदर्भ के प्रभाव को समझना आवश्यक है।

  • जीन पियाजे
  • लेव वायगोत्स्की
  • अलबर्ट बैन्डुरा
  • लॉरेंस कोहलबर्ग

उत्तर : 2

प्रश्न : पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत से निहितार्थ निकालते हुए एक ग्रेड 6-8 के शिक्षक को अपनी कक्षा में क्या करना चाहिए?

  • ऐसी समस्याएँ प्रस्तुत करनी चाहिए जिसमें तर्क आधारित समाधान की आवश्यकता होती है।
  • एक अवधारणा को पढ़ाने के लिए केवल मूर्त सामग्रियों का प्रयोग करना चाहिए।
  • केवल निर्धारित पाठ्यक्रम पर निर्भर रहना चाहिए।
  • तार्किक बहस के प्रयोग को हतोत्साहित करना चाहिए।

उत्तर : 1

प्रश्न : हावर्ड गार्डनर के बहु बुद्धि सिद्धांत के अनुसार, ‘तार्किक-गणितीय’ बुद्धि वाले एक व्यक्ति की क्या विशेषताएँ हो सकती हैं ?

  • दृश्य-स्थानिक परिवेश को सटीक रूप से ग्रहण करने की योग्यता
  • संगीतमय अभिव्यक्तियों के आवाज के स्तर ताल एवं सौंदर्यपरक गुणों का उत्पन्न करने एवं प्रशंसा करने की योग्यता
  • पैटर्न को खोजने की एवं तर्क की लम्बी श्रृंखला का हल करने की क्षमता और संवेदनशीलता।
  • ध्वनि ताल तथा शब्दों के अर्थ के प्रति संवेदनशीलता।

उत्तर : 3

प्रश्न : संरचनावादी उपागम बनाता है कि …… ज्ञान की संरचना के लिए अत्यन्त आवश्यक है।

  • अनुबंधन
  • दण्ड
  • यंत्रवत् याद करना
  • विद्यार्थी का पूर्वज्ञान

उत्तर : 4

प्रश्न : बच्चे अनेक घटनाओं के बारे में सहजानुभूत सिद्धांत की संरचना करते हैं। इस पृष्ठभूमि में एक शिक्षक को क्या करना चाहिए?

  • बच्चों के इन विचारों को खारिज करना चाहिए।
  • बच्चों के विचारों एवं सिद्धांतों को अनदेखा करना चाहिए।
  • बच्चों को इन विचारों के लिए डाँटना चाहिए क्योंकि ये विचार उनके शिक्षण में हस्तक्षेप करते हैं।
  • संवाद के द्वारा बच्चों की इन आवधारणाओं को चुनौती देनी चाहिए।

उत्तर : 4

प्रश्न : निम्नलिखित में से कौन-सी शिक्षण-अधिगम के लिए एक प्रभावशाली शिक्षण प्रणाली नहीं है?

  • प्रयोग एवं पर्यवेक्षण
  • संवाद एवं परिचर्चा
  • दिए गए ज्ञान को दोहराने पर ध्यान केंद्रित करना
  • बच्चों को अंतर्दृष्टि के द्वारा अनुमान लगाने के लिए प्रोत्साहित करना

उत्तर : 3

प्रश्न : समाज में विभिन्न लिंगों के लिए उपयुक्त मानी जाने वाली प्रारूपिक विशेषताओं के बारे में जन सामान्य की अवधारणाओं को क्या कहते हैं ?

  • जेंडर भूमिकाएँ
  • जेंडर पहचान
  • जेंडर रूढ़िवादिताएँ
  • जेंडर विभेदीकरण

उत्तर : 3

प्रश्न : हाल ही में पाठ्यचर्या में ऐसी कहानियों को शामिल करने के लिए विवेकशील प्रयास किया गया है जिसमें पिता घर के कार्यों में लगा रहता है और माता साहसी गतिविधियों को करती है। यह कदम किसलिए महत्त्वपूर्ण है?

  • यह जेंडर रूढ़िवादिता को समाप्त करता है।
  • यह जेंडर स्थिरता को प्रोत्साहित करता है।
  • यह जेंडर विभेदीकरण को बढ़ाता है।
  • यह जेंडर पक्षपात को सशक्त बनाता है।

उत्तर : 1

प्रश्न : वायगोत्स्की के अनुसार, जब एक वयस्क बच्चे के निष्पादन के वर्तमान स्तर को सहयोग द्वारा विस्तारित
करता है तो इसे क्या कहते हैं ?

  • समीपस्थ विकास का क्षेत्र
  • पाड़ (ढांचा)
  • अंतः व्यक्तिनिष्ठता
  • खोजपूर्ण अधिगम

उत्तर : 2

प्रश्न : नूर विद्यालय में अपना लंच बॉक्स लाना भूल गई तथा यह कहते हुए तान्या से उसका लंच साझा करने के लिए कहा, “तुम्हें आज अपना लंच मेरे साथ साझ करना चाहिए क्योंकि कल मैंने तुम्हारे साथ अपना लंच साझा किया था। ” लॉरेंस कोलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अनुसार नूर का कथन ……… अभिविन्यास प्रारूप को …… अवस्था पर दर्शाता है।

  • आज्ञापालन; पूर्व-परम्परागत
  • अच्छा होना; परम्परागत
  • आदान-प्रदान; परम्परागत
  • कानून एवं व्यवस्था, पश्च-परम्परागत

उत्तर : 3

प्रश्न : निम्नलिखित में से कौन से कारक अधिगम को प्रभावित करते हैं?

(i) विद्यार्थी की अभिरुचि
(ii)विद्यार्थी का सांवेगिक स्वास्थ्य
(iii)शिक्षाशास्त्रीय रणनीतियाँ
(iv) विद्यार्थी का सामाजिक एवं सांस्कृतिक संदर्भ

  • (i), (ii). (iii)
  • (ii), (iii)
  • (i), (ii), (iii), (iv)
  • (i), (ii)

उत्तर : 3

प्रश्न : निम्नलिखित में से क्या ज्ञान के सार्थक संरचना की प्रक्रिया का एक महत्त्वपूर्ण पहलू है?

  • लगातार अभ्यास तथा बार-बार स्मरण करना
  • पुरस्कार एवं दंड
  • उद्दीपन-प्रतिक्रिया संबंध
  • सामाजिक पारस्परिक क्रियाएँ

उत्तर : 4

प्रश्न : परिवार एवं पास-पड़ोस, बच्चों के समाजीकरण की

  • प्राथमिक एजेंसियाँ हैं।
  • मध्य एजेंसियाँ हैं।
  • द्वितीयक एजेंसियाँ हैं।
  • मनोवैज्ञानिक एजेंसियाँ हैं।

उत्तर : 1

प्रश्न : बाल्यावस्था की अवधारणा से क्या अभिप्राय है ?

  • समकालीन सामाजिक संरचनावादी मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यह एक सामाजिक संरचना है।
  • यह है कि बच्चे दुष्ट रूप में पैदा होते हैं और उन्हें सभ्य बनाना होता है।
  • यह कि बच्चे शून्य से शुरुआत करते हैं और उनके गुण पूरी तरह से परिवेश के द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।
  • यह विभिन्न सांस्कृतिक संदर्भों में सार्वभौम रूप से समान है।

उत्तर : 1

प्रश्न : जब विद्यार्थी पुरस्कार पाने की इच्छा से बार-बार किसी गतिविधि को करने का निर्णय लेते हैं (जैसा कि एक प्रयोग का नियोजन एवं संचालन करना) जो कि प्रत्यक्ष रूप से उस गतिविधि से संबंधित नहीं है (जैसा कि एक ‘स्टार’ या ‘बैज’ प्राप्त करना) ऐसी स्थिति में क्या सांभावना उत्पन्न होती है?

  • समझने के लिए अधिगम में आनंद प्राप्त करना
  • पुरस्कार के बिना भी उस गतिविधि में लगे रहना
  • अन्य लोगों को खुश करने के लिए कार्य करने के बजाय स्वयं की निपुणता के लिए उद्देश्य निर्धारित करना
  • अधिगम के प्रति भौतिकवादी अभिवृत्ति का विकास

उत्तर : 4

प्रश्न : संज्ञान एवं संवेग के बीच किस प्रकार संबंध होता है?

  • एक दिशीय – संवेग संज्ञान को प्रभावित करते हैं
  • एक दिशीय – संज्ञान संवेगों को प्रभावित करता है
  • द्विदिशीय – दोनों के बीच एक गतिशील पारस्पारिक क्रिया होती है।
  • एक दूसरे से स्वतंत्र हैं

उत्तर : 3

प्रश्न : निम्नलिखित में से कौन सी मध्य बाल्यावस्था’ की विशेषता है ?

  • अमूर्त रूप से सोचने तथा वैज्ञानिक तर्क का प्रयोग करने योग्यता विकसित होती है।
  • बच्चे तार्किक एवं मूर्त रूप से सोचना प्रारंभ कर देते हैं।
  • अधिगम मुख्य रूप से संवेदी एवं चालक गतिविधियों द्वारा घटित होता है।
  • शारीरिक वृद्धि एवं विकास बहुत तेज गति से होता है।

उत्तर : ??

इस प्रश्न का सही उत्तर क्या होगा? हमें अपना जवाब कमेंट सेक्शन में जरूर दें।

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