CTET बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र प्रैक्टिस सेट 39 : परीक्षा में जाने से पहले इन 30 प्रश्नों का कर लें अध्ययन

CTET Child Development And Pedagogy Practice Set 39 : CTET की परीक्षा 16 दिसंबर, 2021 से 13 जनवरी 2022 तक आयोजित कराई जानी है। UPTET की परीक्षा कैंसिल होने के बाद बोर्ड की तरफ से नई परीक्षा तिथि की घोषणा की जा चुकी है। UPTET की नई परीक्षा तिथि 23 जनवरी 2022 को निर्धारित की गई है। इसलिए शिक्षक बनने की चाह रखने वाले लाखों अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। और परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।

ऐसे में इस लेख के जरिए बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र के विगत वर्षों में कराए गए परीक्षाओं में से 30 बेहद महत्वपूर्ण प्रश्नों के संग्रह को लेकर आए है। इसलिए आप इन प्रश्नों का अभ्यास अच्छी तरह से कर लें और अपनी तैयारी को और भी मजबूती प्रदान करें।

CTET Child Development And Pedagogy Practice Set 39

CTET Child Development And Pedagogy Practice Set 39

प्रश्न. विविध पृष्ठभूमियों के अधिगमकर्ताओं को सम्बोधित करने हेतु, एक अध्यापक को –

  • सभी के लिए मानकीकृत आंकलनों का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • ऐसे कथनों का इस्तेमाल करना चाहिए जो नकारात्मक रूढ़िवद्ध धारणाओं को मजबूत करें।
  • विविधता सम्बन्धी मुद्दों पर बातचीत टालनी चाहिए।
  • विविध विन्यासों के उदाहरण लेने चाहिए।

उत्तर : 4

प्रश्न. समस्या-समाधान क्षमताओं को किस प्रकार सुसाध्य किया जा सकता है?

  • समरूपों के इस्तेमाल को बढ़ावा देकर।
  • विद्यार्थियों में डर की भावना पैदा कर।
  • लगातार अभ्यास और कार्यान्वयन पर जोर देकर।
  • समस्याओं के हल हेतु अटल प्रक्रिया के इस्तेमाल को बढ़ावा देकर।

उत्तर : 3

प्रश्न. अधिगम कठिनाइयों से जूझते छात्रों की जरूरतों को सम्बोधित करने के लिए, एक अध्यापक को क्या नहीं करना चाहिए?

  • व्यक्तिगत शैक्षिक योजना बनाना।
  • शिक्षाशास्त्र और आकलन की जटिल संरचनाओं का प्रयोग।
  • दृश्य-श्रव्य सामग्रियों का इस्तेमाल।
  • संरचनात्मक शिक्षाशास्त्रीय उपागमों का इस्तेमाल।

उत्तर : 2

प्रश्न. सृजनात्मकता की पहचान का प्रमुख लक्षण क्या है?

  • अतिसक्रियता
  • कम परिज्ञानता / बोधगम्यता
  • असतर्कता
  • अपसारी चिन्तन

उत्तर : 4

प्रश्न. निम्न में से अध्यापन-अधिगम का सबसे प्रभावशाली माध्यम कौन-सा है?

  • बिना विश्लेषण के अवलोकन करना
  • अनुकरण/नकल और दोहराना
  • विषय-वस्तु यन्त्रवत याद करना
  • संकल्पनाओं के बीच सम्बन्ध खोजना

उत्तर : 4

प्रश्न. एक अध्यापिका को दिए गए किसी कार्यकलाप में छात्रों की विभिन्न त्रुटियों का विश्लेषण करना चाहिए, क्योंकि

  • इसके आधार पर वह ज्यादा त्रुटियाँ करने वाले छात्रों को दूसरे छात्रों से अलग कर सकती है।
  • अधिगम केवल त्रुटियों के शोधन पर निर्भर है।
  • इसके आधार पर वह दण्ड की मात्रा निर्धारित कर सकती है।
  • त्रुटियों की समझ, अध्यापन-अधिगम प्रक्रिया के लिए अर्थपूर्ण है।

उत्तर : 4

प्रश्न. अधिगम की अभिप्रेरणा को किस प्रकार कायम रखा जा सकता है?

  • बच्चों को बहुत आसान क्रियाकलाप देकर।
  • यन्त्रवत याद करने पर जोर देकर।
  • बच्चे को दण्ड देकर
  • प्रवीणता-अभिमुखी लक्ष्यों पर जोर देकर।

उत्तर : 4

प्रश्न. शर्मिंदगी………

  • बच्चों को अधिगम हेतु अभिप्रेरित करने के लिए बहुत प्रभावशाली है।
  • के भाव को अध्यापन-अधिगम प्रक्रिया में बारम्बार पैदा करना चाहिए।
  • का संज्ञान से कोई सम्बन्ध नहीं है।
  • का संज्ञान पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

उत्तर : 4

प्रश्न. अधिगम का संरचनात्मक विचार यह सुझाव देता है कि ज्ञान की संरचना

  • बच्चे सक्रिय भूमिका निभाते है।
  • बच्चे पूर्ण रूप से पाठ्य पुस्तकों पर निर्भर
  • बच्चों की कोई भूमिका नहीं होती।
  • बच्चे पूर्ण रूप से वयस्कों पर निर्भर रहते हैं।

उत्तर : 1

प्रश्न. अधिगम के लिए निम्न में से कौन-सी धारणा उपयुक्त है?

  • प्रयासों से कोई फर्क नहीं पड़ता।
  • असफलता अनियन्त्रित है।
  • योग्यता सुधार्य है।
  • योग्यता अटल है।

उत्तर : 3

प्रश्न. निम्न में से कौन-सी परिपाटी, विद्यार्थियों में संकल्पनात्मक समझ में बढ़ोत्तरी करने में सहायक है?

  • अन्वेषण और संवाद
  • बारम्बार परीक्षाएँ
  • प्रतिस्पर्धा आधारित प्रतिस्पर्धाएँ
  • पाठ्य पुस्तक केन्द्रित शिक्षाशास्त्र

उत्तर : 1

प्रश्न. बच्चों को सीखने में कठिनाई होती है, जब-

  • अधिगम सामाजिक सन्दर्भ में हो।
  • विषय-वस्तु को बहुरूपों में प्रस्तुत किया गया हो।
  • सूचना अलग-अलग टुकड़ों में प्रस्तुत की जाए।
  • वो आन्तरिक रूप से अभिप्रेरित हो।

उत्तर : 3

प्रश्न. अधिगम की सर्वोत्तम अवस्था कौन-सी है?

  • सन्तुलित उत्तेजना, कोई भय नहीं
  • कोई उत्तेजना नहीं, कोई भय नहीं
  • उच्च उत्तेजना, उच्च भय
  • निम्न उत्तेजना, उच्च भय

उत्तर : 1

प्रश्न. बच्चों के विकास की व्यक्तिगत विभिन्नताओं को किस पर प्रतिरोपित किया जा सकता है?

  • ना आनुवंशिकता पर ना पर्यावरण पर
  • आनुवंशिकता एवं पर्यावरण की पारस्परिकता पर
  • केवल आनुवंशिकता पर
  • केवल पर्यावरण पर

उत्तर : 2

प्रश्न. एक कार्य के दौरान, सायना स्वयं से बात कर रही है कि वह कार्य पर किस प्रकार प्रगति कर सकती है। लेव वायगोत्स्की के भाषा और चिन्तन/सोच के बारे में दिए गए विचारों के अनुसार, इस तरह का ‘व्यक्तिगत वाक’ क्या दर्शाता है?

  • आत्म-केन्द्रिता
  • संज्ञानात्मक अपरिपक्वता
  • मनोवैज्ञानिक विकार
  • स्वतः नियमन

उत्तर : 4

प्रश्न. मूल्यांकन पद्धतियों का लक्ष्य होना चाहिए।

  • विद्यार्थियों की जरूरतों एवं आवश्यकताओं की पहचान करना।
  • पुरस्कार-वितरण हेतु उच्च-अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पहचान करना।
  • विद्यार्थियों को नामांकित करना।
  • योग्यता-आधारित समूहों में विद्यार्थियों को विभाजित करना।

उत्तर : 1

प्रश्न. एक गतिविधि के दौरान छात्रों को संघर्ष करते देख, एक अध्यापिका बच्चों को संकेत और इशारे जैसे- ‘क्या, क्यों, कैसे’ प्रदान करने का फैसला लेती है। लेव वायगोत्स्की के सिद्धान्त के अनुसार, अध्यापिका की यह योजना-

  • छात्रों में प्रत्याहार/निकास प्रवृत्तियों पैदा करेगी।
  • अधिगम की प्रक्रिया में अर्थहीन होगी।
  • बच्चों को अधिगम के लिए अनुप्रेरित निष्प्रेरित करेगी।
  • अधिगम के लिए पाड़ आधारभूत संरचना का काम करेगी।

उत्तर : 4

प्रश्न. एक खेल क्रिया के दौरान चोट लगने पर रोहन रोने लगा। यह देखकर उसके पिता कहा, “लड़कियों की तरह व्यवहार ना करो, लड़के रोते नहीं है।” पिता का यह कथन-

  • लैंगिक भेदभाव को कम करता है।
  • लैगिक समानता को बढ़ावा देता है।
  • लैगिक रूढ़िवादिताओं को दर्शाता है।
  • लैगिकवादिताओं को चुनौती देता है।

उत्तर : 3

प्रश्न. एक प्रगतिशील कक्षा में –

  • ज्ञान की संरचना के लिए प्रचुर मौके प्रदान करने चाहिए। विद्यार्थियों को उनके अकादमिक अंकों के आधार पर नामांकित चाहिए।
  • अध्यापक को अटल पाठ्यक्रम का पालन करना चाहिए।
  • विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धा पर बल देना चाहिए।

उत्तर : 1

प्रश्न. लॉरन्स कोलबर्ग के सिद्धान्त के अनुसार, “किसी कार्य को इसलिए करना, क्योंकि दूसरे इसे स्वीकृति देते हैं”, नैतिक विकास के चरण को दर्शाता है।

  • उत्तर-प्रथागत
  • प्रथा-पूर्व
  • अमूर्त संक्रियात्मक
  • प्रथागत

उत्तर : 4

प्रश्न. बच्चों के समाजीकरण के सन्दर्भ में निम्न में से कौन-सा कथन सही है?

  • समकक्षी समाजीकरण के प्राथमिक कारक हैं और परिवार समाजीकरणका एक द्वितीयक कारक है।
  • परिवार एवं जन-संचार दोनों समाजीकरण के द्वितीयक कारक है।
  • विद्यालय समाजीकरण का एक द्वितीयक कारक है और परिवार समाजीकरण का एक प्राथमिक कारक है।
  • विद्यालय समाजीकरण का एक प्राथमिक कारक है और समकक्षी समाजीकरण के द्वितीय कारक है।

उत्तर : 3

प्रश्न. बहु-बुद्धि का सिद्धान्त जोर देता है कि-

  • बुद्धिमता की विभिन्न दशाएँ हैं।
  • बुद्धिमत्ता में कोई व्यक्तिगत विभिन्नताएं नहीं होती है।
  • बुद्धि-लब्धि केवल वस्तुनिष्ठ परीक्षणों द्वारा ही मापी जा सकती है।
  • एक आयाम में बुद्धिमत्ता, अन्य सभी आयामों में बुद्धिमता निर्धारित करती है।

उत्तर : 1

प्रश्न. जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धान्त में, पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था में विकास का मुख्य गुण क्या होता है?

  • परिकल्पित-निगमनात्मक सोच
  • संरक्षण और पदार्थों को क्रमबद्ध करने की क्षमता
  • अमूर्त सोच का विकास
  • विचार/सोच में केन्द्रीकरण

उत्तर : 4

प्रश्न. विकास के सन्दर्भ में निम्न में से कौन-सा कथन सही है?

  • विकास केवल बाल्यावस्था के दौरान ही होता है।
  • विकास बहुआयामी होता है।
  • विकास को दर, सभी संस्कृतियों में सभी के लिए समान होती है।
  • विकास केवल विद्यालय में होने वाले अधिगम से ही होता है।

उत्तर : 2

प्रश्न. लेव वायगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य, अधिगम प्रक्रिया के महत्व पर जोर देता है।

  • अभिप्रेरणा
  • सांस्कृतिक उपकरणों
  • सन्तुलीकरण
  • गुणारोपण

उत्तर : 2

प्रश्न. जीन पियाजे अपने संज्ञानात्मक विकास के सिद्धान्त में, संज्ञानात्मक संरचनाओं को के रूप में वर्णित करते हैं।

  • विकास का समीपस्य क्षेत्र
  • मनोवैज्ञानिक उपकरणों
  • स्कीमा/मनोबन्ध
  • उद्दीपक-अनुक्रिया सम्बन्ध

उत्तर : 3

प्रश्न. एक समावेशी कक्षा में पर जोर होना चाहिए।

  • सामाजिक पहचान के आधार पर छात्रों के अलगाव
  • हर बच्चे के सामर्थ्य को अधिकतम करने के लिए अवसर प्रदान करने
  • प्रदर्शन अभिमुखी लक्ष्यों
  • अविभेदी-समरूपी निर्देशों

उत्तर : 2

प्रश्न. दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (2016) के अनुसार किस शब्दावली का प्रयोग उपयुक्त है?

  • छात्र जिसे शारीरिक दिव्यांगता है।
  • छात्र जिसका अशक्त शरीर है।
  • मन्दित छात्र
  • विकलांग छात्र

उत्तर : 1

प्रश्न. जन्म से किशोरावस्था तक बच्चों में विकास किस क्रम

  • मूर्त, अमूर्त, सांवेदिक
  • अमूर्त, मूर्त, सांवेदिक
  • सांवेदिक, मूर्त, अमूर्त
  • अमूर्त, सांवेदिक, मूर्त

उत्तर : 3

प्रश्न. एक प्रगतिशील कक्षा में व्यक्तिगत विभिन्नताओं को किस प्रकार देखा जाना चाहिए?

  • योग्यता-आधारित समूह बनाने का मापदण्ड
  • अध्यापन-अधिगम प्रक्रिया की परियोजना के लिए महत्त्वपूर्ण
  • अधिगम की प्रक्रिया में बाधा।
  • अध्यापक के पक्ष पर असफलता।

उत्तर : ??

इस प्रश्न का सही उत्तर क्या होगा? हमें अपना जवाब कमेंट सेक्शन में जरूर दें।

आशा है आपको यह प्रैक्टिस सेट पसंद आया होगा, सरकारी परीक्षाओं से जुड़ी हर जानकरियों हेतु सरकारी अलर्ट को बुकमार्क जरूर करें।

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